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CG Ancient History

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Ancient History CG General Knowledge छत्तीसगढ़ सामान्य ज्ञान हिंदी में

Ancient History CG Samanya Gyan छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास

प्रागैतिहासिक काल – (पाषाण काल) Prehistoric time – (Stone Age)

· प्रागैतिहिसिक काल वह काल है, जिसमें इतिहास जान्ने के कोई लिखित प्रमाण नही मिले है,
·इस काल का कोई लिखित प्रमाण नही मिला है किन्तु छ.ग.के अनेक क्षेत्रो से इस काल को जानने के कई प्रमाण मिले है,

इस काल को अनेक भागो में बांटा गया है –This Period Has Been Divided Into Many Parts –

पूरा पाषाण काल – Complete Stone Age
·इस काल के प्रमाण – छ. ग. के रायगढ़ के सिघंपुर गुफा से प्राप्त शैल चित्रों से मिला है, ( सिंघनपुर में मानव आकृतिया, सीधी डंडे के आकर में तथा सीढ़ी के अकार में प्राप्त हुई है )
·रायगढ़ को शैलाश्रयो का गढ़ कहा जाता है
·राज्य में सबसे अधिक शैलचित्र रायगढ़ से मिला है,
मध्य पाषाण काल –Middle Stone Age –
·कबरा पहाड़ में स्थित कबरा गुफा से इस काल से सम्बंधित शैल चित्र मिले है ( लम्बे फलक, अर्द्धचंद्रकार, लघु पाषाण औजार आदि मिले है)
उत्तर पाषाण काल –North Stone Age –
·बिलासपुर के धनपुर से इसके प्रमाण मिले है,
नव पाषाण काल –New Stone Age –
·राजनंदगांव जिले के चितवाडोंगरी, दुर्ग के अर्जुनी, रायगढ़ के टेरम, से इस काल से सम्बंधित चित्रित हथौड़े का प्रमाण प्राप्त हुए है,

प्रगतिहासिक काल Epochal Period

लौहयुग- ( माहापाषाण युग ) – Iron Age- (Maha Maha era)
·दुर्ग के करहीभदर, चिरचारी, में माहापाषाण स्मारक मिले है
माहा पाषाण –Maha Stone –
·शवो को गढ़ाने के लिए किये जाने वाला घेरा होता है,
·दुर्ग जिले के घनोरा ग्राम में 500 माहापाषाण स्मारक मिले है,
·बालोद के कर्काभांठा में – माहापाषाण घेरे और लोहे के औजार मिले है,
सिन्धु घटी सभ्यता का काल- Indus Era Civilization Era
·इस काल के बारे में छ.ग. से कोई जानकारी नहीं मिलती है

वैदिक काल का छ.ग. –Vedic Times

रामायण काल –Ramayana Period
·इस काल में विन्ध्य पर्वत के दक्षिण में कोसल नामक राजा थे जिनके नाम पर यह राज्य को कोसल कहा जाने लगा,
·इस समय दक्षिण कोसल एवं उत्तर कोसल दो भाग थे,
·छ.ग. दक्षिण कोसल का हिस्सा था, अतः छ.ग. दक्षिण कोसल कहा जाने लगा,
·इस काल में बस्तर को दण्डकारण्य कहा जाता था,
·दक्षिण कोसल के राजा – राजा भानुमंत थे, जिनकी पुत्री कौशल्या थी,
·दक्षिण कोसल की राजधानी – श्रावस्ती थी,
·कौशल्या का विवाह उत्तर कोसल के राजा- राजा दशरथ के साथ हुआ
·राजा भानुमंत का कोई पुत्र नही था अतः राजा भानुमंत की मृत्यु के बाद, राजा दशरथ दक्षिण कोसल के राजा बने
·राजा दशरथ के बाद श्री राम यहाँ के राजा बने, उनके बाद उनके पुत्र लव और कुश हुए
·लव उत्तर कोसल के राजा बने, तथा कुश दक्षिण कोसल के राजा बने,
·कुश की राजधानी कुशस्थली थी ( श्रावस्ती का ही नाम था )

रामायण काल के कुछ प्रसिद्ध स्थल है –Some Famous Places Of Ramayana Period

शिवरीनारायण – Shrivanarayan
·राम के वनवास का अधिकांश भाग यही व्यतीत हुआ था, यहाँ पर श्री राम ने सबरी के जूठे बेर खाए,
तुरतुरिया – Tuturia
·ऋषि वाल्मीकि का आश्रम है, राम द्वारा माता सीता को त्यागे जाने पर, माता सीता ने यहाँ शरण लिया था, और, लव और कुश का यहाँ जन्म हुआ था, यह स्थान बलोदाबजार जिले में स्थित है,
सरगुजा में –  Sarguja
·रामगढ़, सिताबोंगरा गुफा, लक्ष्मण बेन्ग्र, किसकिन्धा पर्वत, सीताकुंड, हाथिखोह आदि है
·खरौद में –खरदूषण का शासन था, यह स्थान जांजगीर चाम्पा में है,

महाभारत काल – Mahabharata period 

इस काल में छ.ग. को कोसल व प्राककोसल कहा जाता था,
·बस्तर के अरण्य क्षेत्र को कान्तर कहा जाता था,
·इस काल के शासक मोर ध्वज व ताम्र ध्वज थे,
·मोरध्वज की राजधानी- आरंग, व ताम्रध्वज की राजधानी- मणिपुर थी
·मणिपुर – वर्तमान में रतनपुर ही मणिपुर था
·भाब्रूवाहन की राजधानी चित्रन्गदपुर थी,
·चित्रन्गादपुर, सिरपुर का बदला हुआ नाम था,
·भाब्रूवाहन- अर्जुन और चित्रांगदा के पुत्र थे,
·गूंजी – यह क्षेत्र ऋषभतीर्थ के नाम से प्रसिद्ध था, जो की जांजगीर चाम्पा में है
·बाद में प्राककोसल को सहदेव ने जित लिया था,

माहाजनपद काल- Mahajanapad Kal

·यह 6वी शताब्दी का काल है,
·व्हेनसांग की किताब सी.यु.की. के अनुसार गौतम बुद्ध ज्ञान प्राप्ति के बाद छ.ग. की राजधानी श्रावस्ती में आये थे और तीन माह निवासरत थे
·गौतम बुद्ध के दक्षिण यात्रा की जानकारी हमें “औदान शतक नामक ग्रन्थ” से मिलता है
·इस समय भारतभूमि दो भागो में बंट गया, जनपद और महाजनपद
·छ.ग. चेदी महाजनपद का हिस्सा था, इसी कारन इसे चीदिसगढ़ कहा जाता था,

मौर्यकाल – Mauryan period

·छ.ग. में मौर्य काल के कुछ प्रमाण प्राप्त हुए है, जो इसप्रकार है-
·छ.ग. के तोसली में मौर्यकालीन अशोक के अभिलेख मिले है,
·सरगुजा में जोगीमारा गुफा मौर्यकालीन है,
·सूरजपुर के रामगढ़ के सिताबोंगरा गुफा में विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला मिली है,
·मौर्य कालीन सिक्के — रायगढ़ जिले के सारंगढ़,
·जांजगीर चाम्पा में अकलतरा, ठाठरी
·रायपुर के तारापुर में, आदि जगहों पर मौर्यकालीन सिक्के मिले है,
·जोगीमारा गुफा – देवदासी सुतनुका (नृत्यांगना) एवं देवदत्त नामक नर्तक की प्रणय गाथा मिलती है, जो की पालीभाषा, और ब्राम्ही लिपि में है

सातवाहन युग – Satavahana Era

·मौर्य काल के बाद यह युग आया,
·इस युग की राजधानी प्रतिष्ठान ( महाराष्ट्र ) थी,
·पूर्व ओड़िसा में खारवेल शासको का शासन था, जो की सातवाहन राजाओ के समकालीन थे,
·छ.ग. के पूर्वी भाग का कुछ हिस्सा खारवेल शासको के अंतर्गत आता था,
·छ.ग. में सातवाहन काल ने लम्बे समय तक शासन किया,
·सातवाहन कालीन प्राप्त प्रमाण –सातवाहन राजा अपीलक का एक मात्र मुद्रा जांजगीर जिले के बालपुर एवं बिलासपुर जिले के मल्हार से प्राप्त हुए है,
·जांजगीर चाम्पा के किरारी नामक गाँव के तालाब में सातवाहन कालीन काष्ठ स्तम्भ मिला है,इसमें कर्मचारियों,अधिकारियो के पद व नाम है,
·इस काल के शिलालेख जांजगीर.चाम्पा के दमाऊदरहा में मिले है, जिसकी भाषा प्राकृत है, इस शिलालेख में सातवाहन राजकुमार वरदत्त का उल्लेख मिलता है.

कुषान वंश —Kushan Dynasty
·इस वंश के प्रमुख शासक विक्रमादित्य व कनिष्क थे,
·इस वंश के शासक कनिष्क के सिक्के रायगढ़ जिले के खरसिया के तेलिकोट गाँव से पुरातत्ववेत्ता डॉ. डी. के. शाह को मिले थे,
·ताम्बे के सिक्के बिलासपुर के चकरबेड़ा से मिले है,
मेघवंश- Meghvansh
·गुप्तवंश के पहले मेघवंश शासको ने शासन किया था,
·इन्होने 200 ए.डी. – 400 ए.डी. तक शासन किया,
·इसका प्रमाण मल्हार में मिले इस वंश के सिक्के से मिलता है
वाकाटकों वंश – Wakatatta Dynasty
·इस वंश में शासक प्रवरसेन प्रथम ने समस्त दक्षिण कोसल को जित लिया था,
·इन्हें बस्तर के कोरापुट क्षेत्र मा राज्य करने वाले शासक नलवंशो से संघर्ष करना पड़ा था,
·इनकी राजधानी – नन्दिवर्धन ( नागपुर ) थी
·इनका काल – 3 री – 4 थी शताब्दी थी,

इस वंश के कुछ अन्य प्रसिद्ध शासक – Some Other Famous Rulers Of This Lineage

महेंद्र सेन – Mahendra Sen
·हरिषेन द्वारा लिखित प्रयाग प्रशस्ति में गुप्त शासक समुद्रगुप्त द्वारा महेंद्रसेन को पराजित करने का उल्लेख मिलता है,
रुद्रसेन – Rudra Sen
·इनका विवाह चन्द्रगुप्त द्वितीय की पुत्री प्रभावती से हुआ था,
नरेंद्रसेन – Narendra Sen
·इसके द्वारा कोशल, मालवा, मैकल, पर विजय का उल्लेख हमें पृथ्वीसेन द्वितीय के बालाघाट लेख से मिलता है, इसे नलवंशी शासक भवदत्त ने हराया था,
पृथ्वीसेन– Prithvi Sen
·इसने नलवंशी भवदत्त के बेटे अर्थ पति भट्टारक को हराया था,
·इसने पुष्करी भोपालपटनम को बर्बाद कर दिया था,

गुप्तकाल- The Secret Time

·इनका समय ईसा. से चौथी शताब्दी का है,
·गुप्त काल के प्रारम्भ में छ.ग. दो भाग दक्षिण कोशल व उत्तर कोशल में बंट गया था,
·इस समाय छ.ग को दक्षिणापथ(कोसल) , व बस्तर को माहाकंतर कहा जाता था,
·दक्षिण कोसल के शासक राजा महेंद्र सिंग एवं महाकांतर के शासक व्याघ्रराज थे,
·इनके समकालीन शासक समुद्र गुप्त ने इन्हें परास्त किया था, ( समुद्रगुप्त द्वारा इन्हें परास्त करने का उल्लेख हमें हरिषेण कि किताब “प्रयाग प्रशस्ति” में मिलती है,)
·इस काल के सिक्के हमें रायपुर जिले के पिटाई वल्द ग्राम से 1 सिक्के मिले है,
·दुर्ग के बानबरद से 9 सिक्के व रायपुर के आरंग से भी इस काल के सिक्के मिले है, जिससे यह स्पष्ट होता है की इस काल के शासको ने गुप्त वंश का प्रभुत्व स्वीकार किया था,
·इन सिक्को में गुप्तवंशीय राजा महेंद्रादित्य व विक्रामादित्य का नाम अंकित है,
·ये शासक कुमारगुप्त व स्कंदगुप्त ही थे, जिनका नाम इन सिक्को में अंकित है,
·1972 में इस काल के 9 सिक्के मिले थे, जिसमे पहला सिक्का कांच का था, दूसरा सिक्का कुमारगुप्त का व अन्य सिक्का विक्रमादित्य (स्कंगुप्त ) का था

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